महाभारत कथा (Mahabharat katha) के समय में अर्जुन के पास एक धनुष था जिसका नाम गांडीव (Gandeev) था और एक अक्षय तरकश था जिसके बाण कभी समाप्त नहीं होते थे। अर्जुन ने इसी दिव्य धनुष का कुरुक्षेत्र में महाभारत के युद्ध मे उपयोग करके कौरवों का खात्मा किया था ।

Arjun"s bow Gandeev
महाभारत प्रसिद्ध गाँडीव

अर्जुन के गांडीव (Gandeev) के कुछ अनसुलझे से रहस्य हैं जो महाभारत मे नही मिलते हैं , जिनसे आज मैं आप सब को अवगत कराऊंगा।

ये तो तय था की ये धनुष केवल अर्जुन के लिए नहीं बनाया गया था , तो फिर आखिर ये बना कैसे , किसने बनाया , क्यों बनाया , किस किस ने उपयोग किया और फिर महाभारत ख़तम हो जाने के बाद गांडीव (Gandeev) आखिर कहाँ  गया।

आइये एक एक करके इन सब बातों का पता लगाते हैं —-

अर्जुन को गांडीव किसने दिया और क्यों —

कहा जाता है कि महाभारत मे जब पांडवो को हस्तिनापुर से निकाल दिया गया था तो उनको खांडव वन में निवास करने का आदेश मिला था।

वहां पहले एक नगर हुआ करता था पर उसके अवशेष ही बचे थे , जिसको वहां जंगलों ने घेर लिया था।

वहां नागराज तक्षक का आतंक था।  उसने पांचो पांडवों और प्रजा पर हमला कर दिया। 

अर्जुन ने उसका जवाब दिया और वन में अग्नि देव से प्रार्थना करके आग लगा दी।

बाद में इन्ही अग्नि देव ने वो धनुष अर्जुन को उपहार की तरह दे दिया। 

अब सोचने वाली बात ये है कि खांडव वन को जला कर आखिर अग्नि देव इतने खुश क्यों हो गए। आइये इसके बारे में भी आपको बताते हैं —

एक कथा है कि श्वेतकि के यज्ञ में 12 वर्षों तक घृतपान करने से अग्नि देव को तृप्ति के साथ साथ अपच भी हो गया था। तब वे ब्रह्मा के पास गए। 

ब्रह्मा ने उनसे खांडव वन को जलाने को कहा।  परन्तु स्वयं इंद्र उस वन की रक्षा करते थे तो कई प्रयास के बाद भी  अग्नि देव उस वन को जला नहीं पाए।

वो फिर से ब्रह्मा के पास गए तो ब्रह्मा जी ने उनसे कहा कि जब अर्जुन वहां वास करने आएंगे तभी आपका ये अपच का रोग ख़तम होगा। 

इसीलिए जब अर्जुन ने अग्नि देव की सहायता से खांडव वन को जलाया तो अग्नि देव का रोग खत्म हो गया और उन्होंने खुश होकर अर्जुन  को गांडीव दिया। 

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किसने और किससे बना था गांडीव —

इसके पीछे भी 2 कथाएं हैं , आइये हम दोनों ही आपको बताते हैं – 

प्रथम कथा —

वत्तासुर नाम का एक दैत्य था जिसका सम्पूर्ण धरती पर आतंक था। उसके आतंक का सामना करने के लिए दधीचि ऋषि ने अपनी हड्डियों का दान कर दिया था।

उनकी हड्डियों से 3 धनुष बने -गांडीव , पिनाक और सारंग। और उनकी छाती की हड्डियों से इंद्र का वज़्र बनाया गया।

इस सभी दिव्यास्त्रों के साथ वत्तासुर से युद्ध हुआ और उसे परास्त किया जा सका। कहते हैं कि इंद्र से पिनाक शिव के पास गया। शिव जी ने इसे परशुराम को दे दिया।

परशुराम ने राजा जनक को और भगवान राम ने इसे तोड़ दिया था। 

सारंग धनुष विष्णु जी के पास था वह से यह राम जी के पास आ गया और बाद में कृष्णा के पास। कहते हैं कि गांडीव उस समय अग्नि देव के पास था जिसे बाद में अर्जुन ने ले लिया। 

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दूसरी कथा –

कण्व ऋषि ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप कर रहे थे। तप के दौरान उनका शरीर दीमक के द्वारा बाम्बी बना दिया गया।

बाम्बी और उसके आस पास की मिटटी के ढेर पर सुन्दर गठीले बांस उग आये थे। जब कण्व ऋषि की तपस्या समाप्त हुयी तो ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उनको अनेकों वरदान दिए। 

जब वे जाने लगे तो उनकी  नजर उन बांसों पर पड़ी। ब्रह्मा जी ने सोचा कि कण्व ऋषि की मिटटी पर उगे हुए ये बांस कोई साधारण बांस तो नहीं हो सकते।

तब ब्रह्मा जी उसे काट कर ले गए और विश्वकर्मा को दे दिया। कहा जाता है कि विश्वकर्मा ने उनसे वो तीनो धनुष बनाये। 

क्यो अर्जुन ने युधिस्थिर का वध करने के लिए उठा लिया था अपना Gandeev

गांडीव(Gandeev) का महाभारत से पहले किसने और कितने समय के लिए उपयोग किया —

  1. ब्रह्मा ने गांडीव को तैयार किया और 1000 साल तक धारण किया , बाद में उन्होंने इसे एक प्रजापति को दे दिया।  
  2. प्रजापति ने धनुष को 503 वर्षों तक अपने पास रखा और फिर इसे इंद्र को दे दिया। 
  3. इंद्र ने गांडीव से लाखों राक्षसों को मार डाला। ये धनुष उन्होंने 65 साल तक अपने पास रखा और फिर   देवता सोम को दे दिया। 
  4. सोम ने गांडीव को 500 वर्षों तक अपने पास रखा और फिर धनुष वरुण को दे दिया। 
  5. वरुण ने 100 वर्षों तक गांडीव को अपने पास रखा और फिर अग्नि देवता के आग्रह पर 2  अक्षय तरकश के साथ उन्हेँ दे दिया। अक्षय तरकश के बारे में कहा जाता है कि  इनके बाण कभी खत्म नहीं होते थे। 
  6. अर्जुन ने 65 सालों  तक गांडीव को धारण किया। 

अर्जुन के बाद गांडीव (Gandeev)का क्या हुआ —

कहते हैं महाभारत कथा में (mahabharta) गांडीव धनुष अलौकिक था। यह धनुष देव , दानव तथा गंधर्वों से अनंत वर्षो तक पूजित रहा।

वह किसी शस्त्र से नष्ट नहीं हो सकता था और 1 लाख धनुषों का एक साथ सामना कर सकता था।

जो भी इसे धारण करता था उसमे अनंत शक्ति का संचार हो जाता था। इसी के साथ अक्षय तरकश भी था जिसके बाण कभी समाप्त नहीं होते थे। 

अर्जुन ने गांडीव को 65 सालो तक अपने पास रखने के बाद वरुण देव को वापस कर दिया था। 

आशा है आपको ये जानकारी पसंद आयी होगी।  मैं आगे भी इसी प्रकार के और रोचक तथ्य लेके आता रहूँगा। 

Categories: Stories

4 Comments

Financer · June 16, 2020 at 10:24 pm

Wowww

sk · June 17, 2020 at 10:19 pm

this is a beautiful story. thanks for this.

Shah · June 17, 2020 at 10:40 pm

Great and unknown to me

Navneet · June 17, 2020 at 10:45 pm

Wow

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