How do you define FAILURE–

Hello Friends, FAIL एक ऐसा word जो धड़कनें रोक देता है,एक ऐसा परिणाम जो बढ़ते हुए कदमो को रोक देता है और रुके हुए क़दमों को बढ़ने नहीं देता | पर क्या सच में FAILURE अंत है ? आप किसी भी काम को जब शुरू करते हैं तो कितने उत्साहित होते हैं,कितने positive होते हैं | एक smile के साथ हम आगे बढ़ते हैं |

failure in life

पर जैसे जैसे चीजें हमारे मन की नहीं होतीं वो उत्साह वो smile कही खो जाती है | पर ऐसा क्यों होता है? क्या कुछ शुरू करते समय हमें पता होता है की सब अच्छा  ही होगा  या हमारे मन का ही होगा ? नहीं। बल्कि हमें पहले से पता होता है कि struggle करना होगा। हमें पहले से पता होता है कि जरुरी नही कि जो हम सोच रहे हैं exactly वही होगा। तो फिर क्यों पहली ठोकर से ही वो उत्साह वो smile हम खो देते हैं। तो क्या वही ठोकर ही FAILURE है?

नहीं बिलकुल नहीं। FAIL हम तब हो जाते हैं जब हमारे चेहरे से smile चली जाती है। वही है हमारी FAILURE | मैं ये बिना बात के नहीं कह रहा दोस्तों ,आप हमेशा से quotations पढ़ के छोड़ देते हो कि हर problem का सामना मुस्कुरा के करो | तो इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है की हर समय आप पागलो की तरह हँसते रहो ,नहीं बिलकुल नहीं बल्कि मैं कहता हूँ कि जब तक आप काम करो serious रहो।

पर यहाँ मुस्कुराने का मतलब है कि आप अपनी सबसे पहली starting वाली smile बचा के रखें बस। और अगर अपने वो बचा ली तो आप कभी FAIL हो ही नहीं सकते ये मेरी गारंटी है,पर हाँ वो smile real होनी चाहिए। एक बहुत अच्छी कहावत है दोस्तों कि –When life puts you in tough situations, Dont say “why me”..Just say “Try me ” 

failure and success

मेरे पास लोगों के emails आते हैं कि सर मैंने ये किया मैंने वो किया पर सब ख़तम हो गया ,मैं FAIL हो  गया सर ,मैं निराश हो गया लाइफ से। क्यों भाई ? क्यों FAIL हो  गए ? क्या लाइफ ख़तम हो गयी ? आप कौन होते हो हार या जीत decide करने वाले ? आपको किसने power दी रिजल्ट बताने की ?

अरे अगर आप की जिंदगी का एक दिन भी बचा है तो आप FAIL हो ही  नहीं सकते। हारते तो तब हैं न जब कोशिश करना बंद कर देते हैं। और अगर आप जिन्दा हो और आपके पास एक दिन है तो इसका मतलब आप कोशिश कर सकते हो और अगर आप कोशिश कर सकते हो तो इसका  मतलब है की अभी तक कोई FAILURE नही हुयी है  

Failure doesn’t mean you are a failure it just means you haven’t succeeded yet.

असफलता  का  ये  मतलब  नहीं  है  कि  आप  असफल   हैं  इसका  बस  ये  मतलब  है  कि  आप  अभी  तक  सफल  नहीं  हुए हैं .

Robert H. Schuller रोबेर्ट एच . स्कूलर

दोस्तों , देखो मैं बस इतना जानता हूँ कि गिरते सब हैं , हारते सब हैं ,टूटते सब हैं ,लेकिन जो हार पे वार करता है वही बिल गेट्स बनता है,अब्राहम लिंकन बनता है,इस्साक न्यूटन बनता है| अब आप सोच रहे होंगे कि मैंने ये ३ नाम क्यों लिए। देखो दोस्त नाम तो कई हैं,खोजो तो हजार मिल जायेंगे पर इनका नाम मैंने इसलिए लिया क्युकी ज्यादातर लोग इनके साथ क्या हुआ जानते नहीं। मैं आपको Short में इनकी असफलताओं के बारे में आपको बताता हूँ। सफलताओं मैंने इसलिए नहीं बोला क्योकि उसके बारे में तो बच्चा बच्चा जानता है। 

1. बिल गेट्स / Bill Gates

बिल गेट्स यह नाम हम सब जानते है। बिल गेट्स माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। सब जानते है की वह एक दशक से भी ज्यादा दुनिया के सबसे अमीर  व्यक्ति रह चुके है पर बहुत कम लोग जानते है की 1970 के पहले अपना Business शुरू करने से पूर्व वह हॉवर्ड विश्वविद्यालय से dropout हो चुके थे।इतना ही नहीं Microsoft के पहले उन्हें Traf-O-Data नामक अपनी company के business में भी failure का सामना करना पड़ा। पर वह अपने failure पर रुके नहीं और आगे जाके उन्होंने Microsoft के जरिये Computer की दुनिया ही बदल दी।

2. अब्राहम लिंकन / Abraham Lincoln

अब्राहम लिंकन  ने अपने पूरे जीवन काल में 5 साल से ज्यादा पढाई नही की। और जब वह बड़े हुए, तो वह राजनीती में शामिल हुए और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के 16 वे राष्ट्रपति बने लेकिन् उससें पहले अपने जीवन में वो 12 बार FAILURE देखी।इतनी असफलताओ के बाद भी वह डटे रहे और इस कारन आज भी उनका नाम इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण लोगो में लिया जाता है।

3. इस्साक न्यूटन / Isaac Newton

इस्साक न्यूटन उस समय के बहुत बड़े अंग्रेजी, गणित के जानकार थे। उनके प्रकाशविज्ञान और गुरुत्वाकर्षण के आविष्कार ने उन्हें दुनियाभर में पहचान दिलाई और महान वैज्ञानिक भी बनाया।बहुत लोग को ऐसा लगता है की इस्साक बचपन से ही होशियार थे, लेकिन ऐसा नहीं है। वह अपने school से भी खुश नहीं थे और उनके शिक्षक उन्हें बेवकूफ समझते थे। और कई बार उन्हें school से बाहर भी कर देते थे।पर बचपन से ही उन्हें गणित विषय में बहुत interest था जिसके कारण उन्होंने आगे जाके Science में कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण चीज़ो पे काम किया और नए नए सिद्धांतो के आधार पर महान वैज्ञानिक बने।

Is FAILURE a good thing ?–

कुछ समझ आया दोस्तों ? अगर बिल गेट्स हमारी तरह FAIL हो  के बैठ गए होते तो ना मैं ये ब्लॉग लिख रहा होता और ना आप पढ़ पा रहे होते,क्योंकि computer क्रांति इनकी देन है। आपको बस कभी 2 चीजें नहीं हारनी हैं  संकल्प तथा दृढ इच्छाशक्ति। जैसे हम लोगों को बड़ा fancy लगता है ना कि महाभारत में भीष्म को इच्छामृत्यु का वरदान था। यार तो हमारे पास भी तो है न वो वरदान। भाई अगर हम हार मान लेते हैं तो वैसे भी मरे हुए ही हुए न यार। हार मान  के  जीने का क्या फायदा ? पर अगर हम लड़ते हैं कोशिश करते हैं तो हम अपने को मरा तब मानेंगे जब हम हार मान लेंगे  , तो हुआ न इच्छामृत्यु का वरदान ?भाई दुनिया जानती है कि भीष्म तबतक नहीं हारे जब तक वो लड़ रहे थे ,वो तब हारे जब उन्होंने हथियार रख दिए,जब उन्होंने लड़ना बंद कर दिया।मैं भी बस यही समझाना चाहता हूँ दोस्तों कि लड़ो| problems के सामने हथियार मत डाल दो। कुछ भी impossible जैसा नहीं है दुनिया में। 

nothing is impossible

उठो , जागो और अपने लक्ष्य को प्राप्त करो —

reasons why we fail

आप सबने स्वामी विवेकानंद का नाम तो सुना ही होगा। उन्होंने कहा था कि ” उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये “ | आपने कभी सोचा है कि उन्होंने उठो word क्यों use  किया ? यहाँ उठो का मतलब ये नहीं है दोस्तों की हम कहीं बैठे हैं और हमें उठना है। नहीं  …. स्वामी जी ने उठो का use इसलिए किया है कि ठोकर खा के रुक मत जाओ , बैठ मत जाओ ,निराश मत हो जाओ बल्कि उठो दुगनी हिम्मत से उठो और अपने लक्ष्य को देख के आगे बढ़ो। फिर गिरो फिर ठोकर खाओ पर फिर लड़ो और एक दिन आप जो चाहोगे आप को मिल ही जायेगा। 

How do we stop FAILURE–

FAILURE को रोकने के लिए पहले हमे लक्ष्य का ज्ञान होना चाहिए ।अपनी हिम्मत के हिसाब से लक्ष्य decide करना चाहिए । आइये इसे समझते है —

लक्ष्य क्या होता है —-

दोस्तों जब भी हम FAILURE या SUCCESS के बारे में बात करते हैं तो सबसे पहले सवाल उठता है कि FAIL होना और सफल होना है क्या। दोस्तों simple सा funda है ,लक्ष्य मिल गया तो सफल, ना मिला तो FAIL ….. पर आखिर ये लक्ष्य है क्या। दोस्तों लक्ष्य की एक simple सी परिभाषा है -जो मुकाम किसी के  द्वारा हासिल कर लिया जाता है वो बाकी लोगो के लिए और इतिहास के लिए लक्ष्य हो जाता है। यानि कि लक्ष्य हमें कोई बना कर नहीं देता ,हम खुद अपने लक्ष्य को बनाते हैं। 

लक्ष्य की सीमा —

मुझे आज शाम के ४ बजे तक कैसे भी करके चाँद पे हो के आना है ये मेरा आज का लक्ष्य है । is it possible ?

नहीं। …. आप जब भी कोई काम शुरू करें तो सबसे पहले अपनी capability को देखें , न कि goal बनाएं | ये जानना बहुत जरुरी होता है कि हम क्या कर सकते हैं। ज्यादातर वो लोग ही FAIL  होते हैं जो पहले goal तय करते हैं और बाद में अपनी  क्षमता। 

  • जीवन में अगर आपको सबसे पहले attempt में सफल होना है तो अपना goal अपनी क्षमता से भी कम रखिये। और फिर उसको आप आसान प्रयासों में प्राप्त कर लेंगे। 
  • फिर आप अगला goal अपनी क्षमता के बराबर रखिये। कठिन प्रयास करिये , तरीके खोजिये और उस लक्ष्य को भी प्राप्त करिये। 
  • उसके बाद आपको अगला step ये लेना है कि पहले आपको अपनी क्षमता बढ़ानी हैं ना कि goal …. पहले क्षमता बढ़ाइए और जब आप confirm हो जाएं कि अब आप अगला प्रयास कर सकते हैं तब अपना अगला लक्ष्य बनाइये। 

Why do we FAIL in life–


पर  एक बात का हमेशा ध्यान रखना है दोस्तों की प्रयास करने और लक्ष्य प्राप्त करने की इस पूरी process में आपको कभी अहंकार नहीं आना चाहिए। क्योकि जब भी आपको अहंकार आता है आप सुनते आ रहे हैं कि आपका downfall शुरू हो जाता है।

अच्छा क्या कभी आपने कही पर भी लिखा हुआ देखा है की अहंकार  बड़े से बड़े लोगो को नष्ट कैसे कर देता है ? या किसी ने आपको सरल शब्दों में बताया हो कि आखिर अहंकार से लोग बर्बाद कैसे हो जाते हैं। शायद ना बताया हो। चलिए मैं आज आपको समझाता हूँ कि आखिर अहंकार में ऐसी क्या ताकत है। .. 

देखिये दोस्तों , अहंकार खुद कुछ भी नहीं कर सकता है ,ना अच्छा कर सकता ना बुरा।  मैंने आपको २ स्टेप्स बताये goal पाने के। पहला -अपनी क्षमता से कम रखिये पहला aim .  और दूसरा कि जैसे ही पहला goal आप पा जाएं तो अगला अपनी क्षमता के  बराबर रखिये।

चलिए अब अगर हम मान लें कि आपने दोंनो बार अपने goal को पा लिया तो बहुत से ऐसे लोग होते हैं जो मेरा बताया हुआ 3rd step follow नहीं करते। मतलब वो अपनी क्षमता को समझे बिना ही आंके बिना ही पहले goal बनाते हैं और जोश में उसको पूरा करने में लग जाते हैं। और इसी जोश को इसी उतावलेपन को अहंकार कहते हैं जिससे कि वो टूट जाते हैं।

मैं आपको एक रोजमर्रा के example से समझता हूँ। हम सब में से बहुत से लोग रोज gym जाते होंगे। वह अलग अलग तरह के instruments use करते होंगे। अब मान लें कि हमने 5  किलो वेट उठाने से gym की शुरुवात की। हमारा खुद का वेट था 70  किलो। तो हमारा जो लक्ष्य था वो हमारी क्षमता से कम था। जिसको की हम आसानी से प्राप्त कर लेंगे। अब हमे २ महीने हो गए gym जाते हुए। अब हमारी क्षमता बढ़ चुकी है।

अब हमने अपने लक्ष्य को बड़ा किया और 10  किलो वेट उठाने का प्रयास किया। जाहिर सी बात है की चूँकि ये लक्ष्य हमारी क्षमता के ठीक बराबर है तो कठिन है पर असंभव नहीं। चलिए हमने कुछ दिन के प्रयास के बाद उसको भी प्राप्त कर लिया। पर अब क्या हम तैयार हैं कि  हम सीधे heavy weight championship में participate कर सकते हैं?? बिलकुल नहीं।

अब हमको समझना है कि हम अपनी क्षमता के बराबर आ चुके हैं। अब तुरंत लक्ष्य बढ़ा देने का मतलब है हार , निराशा। जो इस बात को समझ लेता है वो पहले प्रयास करता है अपनी क्षमता बढ़ाने का न कि लक्ष्य बढ़ाने का। यही हमारा 3rd step है। अहंकार और जोश में बहुत हल्का सा फर्क है दोस्तों और इसे समझना बहुत जरुरी।और जिस दिन आप ये फर्क समझ जाएंगे उस दिन से FAILURE आपकी लाइफ का हिस्सा नही रहेगी ।

Categories: Motivational

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